आँख बिना है जग सुना, हर पल लगे समान।
आँख जिसे है सब पता, भोर शाम का ज्ञान।।1।।
पीड़ रहा तन मन कभी, नयनन होत अधीर।
करुण नही जब तज सके, बहे आँख से नीर।।2।।
मोहक आँखें है बना, तन का कोमल अंग।
सारी वेदना को सहे, देख लड़े भी जंग।।3।।
बँधा हुआ है ये रसी, पेड़ लता की डार।
खारे मोती कण ढ़ले, सखा प्रेम परिवार।4।।
तेरस आँसू कह गये, हल्का होता भार।
रिश्ते नाते जब मिले, और बहा नित धार।।5।।
तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
email: aansukai4545@gmail.com
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