Sunday, 30 April 2017

*मैं हूँ मजदूर*

Created by : Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :01/05/2013
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मैं हूँ मजदूर।
कभी बेबस लाचार ,
फिरता हूँ फूटपाथ पर।
और कहीं कुचों गलियों में ,
तो कहीं अंधेरी रात पर।
दुनिया का है दस्तूर , 
मैं हूँ मजदूर।

      फटे कपड़े लपेटे हुए ,
      निकलता जब काम पर।
      खून पसीना बहता तन से ,
      थका हारा सो जाता रात पर।
      अपना जीवन है हुजूर  ,
      मैं हूँ मजदूर।

नहीं मेरा ठौर ठिकाना ,
कभी यहाँ - वहाँ तलाश पर ,
काँटे कील चोट लगता है ,
कराहता हूँ रात जाग कर।
पीड़ा से हूँ चुरचुर।
मैं हूँ मजदूर।

      औरों की महल बनाता ,
      मजबूत बाहों की नीव पर।
      निकालता पानी पत्थर से ,
      परिश्रम से खीच कर।
      पर निर्धन हूँ जरुर ,
      मैं हूँ मजदूर।

मेरा बसेरा घास फूंस की ,
सकुटुम्ब रहते घुँस कर।
दीन की व्यथा कोई न जाने ,
सहते हैं टूट -टूट कर।
ना कोई मुझे गुरुर ,
मैं हूँ मजदूर।

      प्रणाम मेरा ईश्वर को ,
      बनाया मजदूर इस जनम पर।
      अस्थि भी मेरा काम आयें ,
      बज्र बनके कलंक पर।
      बस यही है जुनून ,
      मैं हूँ मजदूर।

कसम है माँ भारत की ,
मिट जाऊं इस मिट्टी पर।
दुश्मन से चट्टान बनके ,
गिर जाऊं उसके बस्ती पर।
अंतिम जीवन का है उसूल ,
मैं हूँ मजदुर।

            रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
              सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
         जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
            मोबा.- 9165720460
   

Saturday, 29 April 2017

*नवां जुग के उदीम(दोहा)*

Created by : Teras Kaiwartya(Aansu)
Date : 16/01/2016
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अइसन जुग आय भइया, काय-काय होवथे।
लइका ह सियान बनके, बाप ल सीखावथे।

दुध दही महुरा बनगे, होगे अमरित दारु।
पी पी के चोर होगे, किंदरत हे लफाड़ु।

ठेला म नइ दिखे पान, कोनो नइ खावथे।
लइका अउ सियान तको, गुटका चबलावथे।

भाटा पताली गोभी, बयलर कस उपजाय।
का होगे साग भाजी, सिरतोन नइ मिठाय।

गाय बइला कम होगे, दौरी डोर नी दिखे।
खेत ट्रेक्टर म जोते, हार्वेस्टर म मिसे।

चिठ्ठी पाती नइ आय, मोबाइल ह छागे।
मिनट म गोठ हो जाथे, तन मन ह हरियागे।

ना गुदुम डफरा गम्मत, डीजे झम नाचथे।
सातुर भिर्री गंवागे, क्रिकेट सब भावथे।

घानी जाता लुकागे, नवां मशीन ह आय।
बफर सिस्टम के पार्टी, ठाढ़े होके खाय।

बाप के जियत म बेटा, मेछा तक ल मुड़ाय।
जोहार पलगी भूलय, नमस्ते मे हियाय।

टूरा मन अलाल होय, मारय लउठी खोज।
टूरी मन बेटा बनय, दइ ददा ल अब पोस।

सिरतोन सत के राज नही, लबारी ल पतियाय।
सुरता म आँसू निकले, जमो चीज नंदाय।

          रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
         मोबाइल - 9165720460

Sunday, 23 April 2017

* तांत्रिक *

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 10/12/2016
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ईष्ट देवी प्रतिपल बल साधक ,
शक्ति प्रदत्त उत्सुक मन उमंग।
क्लेश द्वेष खण्डित भय मुक्ति ,
सुखद समृद्धि स्वयंभू जन प्रसंग।

      आराध्य पूर्ण तल दीप पुंज ,
      रक्त रंजित प्राण तन बलि।
      तंत्र मंत्रोच्चार कारक ध्वनि ,
      दृश्य यज्ञ प्रविष्ट उत्पन्न काली।

क्रुरता निर्मम यत्र वध आहुति ,
स्वार्थ सिद्धि नित कपट चरित्र।
अंधविश्वास रुढ़िमत व्यापित ,
भ्रमित निर्दोष लिप्त विचित्र ।

      नरसंहार भांति क्रियाशील दानव ,
      रुप विकराल वेश खल तांत्रिक।
      खिलवाड़ चमत्कार प्रकृति विद्या ,
      कलंकित आदमखोर मृत्यु दण्डित।

आर्थिक लोलुप रचाकर व्यवसाय ,
गमन लूटपाट चर्चित नाम दाम।
समूह विकट चहुँ जाल सृजनशील ,
अद्भुत मायाशक्ति कमाल विज्ञान।


      रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
        सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
    जिला :- बलौदाबाजार (छ. ग.)
        मो. :- 9165720460

Sunday, 2 April 2017

* अब्बड़ घाम ददा *

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 01/03/2017, * अब्बड़ घाम ददा *
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अब्बड़ घाम ददा !
पंछा मुड़ म ढ़ाँक ले।
अब्बड़ घाम सगा !
रद्दा थोकिन झाँक ले।

नंगत बेरा ल झिन रेंग ,
      भाजी कस अइला जाबे।
गोंदली धर ले संग म ,
      नइ तो निचट झोला जाबे।
अब्बड़ घाम ददा !
पानी भर डब्बा राख ले।

पानी जुच्छा झिन बोहा ,
      बूंदी - बूंदी सकेल जतन।
जी ल राखे बर पानी पीयाउ ,
      हावय संगी मन हीरा रतन।
अब्बड़ घाम ददा !
गुन ले हाट के आत ले।

चिरइ चिरगुन पियास हावय ,
      छानही ऊपर रख देवा पानी।
पुन के बुता कर मइन्खे ,
      बनव झिन कर आनाकानी ।
अब्बड़ घाम ददा !
कुहकही आत चउमास ले।

दही आमा कुसियार रस ,
      पी - पी के देह ल जुड़ावा।
दारु मंउहा झिन पियव ,
      अउ झिन मुड़ ल मुड़ावा।
अब्बड़ घाम ददा !
बने लागथे नहात ले।

जादा पानी पी भाजी पाला खा ,
      नान्हे लइका कस रुख ल जगा।
जुढ़हा सुग्घर छइंहा दिही ,
      जम्मो कोती सफ्फा उदिम करा।
अब्बड़ घाम ददा !
बने फरिया के बाछ ले।

गरीब कमीया मन बर ,
      का घाम अउ का छइंहा।
खटे जांगर चलाथ रथे ,
      अपन परिवार ब तुमन सइहा।
अब्बड़ घाम ददा !
पसीना ओगारथे कमात ले।

अब्बड़ घाम ददा !
शुरु हो जाथे पहात ले।


        रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
          सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
      जिला  - बलौदाबाजार (छ.ग.)
       मोबाइल - 9165720460
  email : aansukai4545@gmail.com



   

Wednesday, 8 March 2017

* दर्द विदाई की *

Created by :- Teras Kaiwartya(Aansu)
Date :- 15/01/2017
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दिल में छुपा रखना मेरी यादें, दिल में छुपा रखना।
मन से हटा रखना फरियादें, मन से हटा रखना।
जहाँ भी जाओ, हमें ना भुलाओ।
यही सोच जगा रखना।

ओझल हो रहें पलकों से, इतने पलों के नयनों से।
पीड़ा भरी इन फासलों से, छिपने लगे है आइनों से।
नजरें सदा तुम्हें ढूँढ़ती रहेगी। दिल में बसा रखना।

आँसू की धारा निकलने लगी, अपनों से अब बिछड़ने लगी।
शोर तुम्हारे सिमटने लगी, जोर से धड़कन धड़कने लगी।
आवाज कानों में गूँजती रहेगी। दिल में बिठा रखना।

दूआएँ हमारी है सभी को, ना लेना दिल में कमी को।
लक्ष्य में अविरल चलते रहें, रुकना नही आगे बढ़ते रहें।
गैर साबित ना ही करेंगें। दिल में लगा रखना।

दिल में छुपा रखना मेरी यादें। दिल में छुपा रखना।
मन से हटा रखना फरियादें। मन से हटा रखना ।
जहाँ भी जाओ, हमें ना भुलाओ।
यही सोच जगा रखना।

रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
मोबाइल :- 9165720460

Tuesday, 10 January 2017

* छत्तीसगढ़ के कोरा *

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 01/01/2017
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मोर छत्तीसगढ़ के माटी हावय ,
धान के कटोरा।
अही म देवता धामी बिराजे ,
जिहां होथे मेला।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

भुइंया कोड़ - कोड़ ओल बनाये ,
देह म पसीना चुचवाये ग - २
सेवत - सेवत धान बढ़ाये ,
खटे जांगर के फल पाये ग - २
कतक सुग्घर कुंवर हावय , 
मोर दाई के कोरा।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

मगन होके नाचे किसान ,
करे सोनहा दाना के दान ग - २
किंदरे लहके लइका सियान ,
सुवा ददरिया गावे मितान ग - २
नवा धान पूस खुशी मांगे ,
घरो - घरो छेरछेरा।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

मनखे इहां के नीक लागे ,
छत्तीसगढ़ी बड़ मीठ लागे ग - २
अंतस के गोठ नइ लुकाये ,
घेंच मुड़ी अउ नवाये ग - २
छत्तीसगढ़ के खांटी तिहार
हरेली अउ तीजा पोरा।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

मोर छत्तीसगढ़ के माटी हावय ,
धान के कटोरा।
अही म देवता धामी बिराजे ,
जिहां होथे मेला।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के। ४

            रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
              सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
              मो.- 9165720460

Saturday, 7 January 2017

~• कइसन जुग •~

Created by-Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 03/11/2016
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अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
लइका सियान बनके, बेटा बाप ल सिखावथे।
दुध दही ह महुरा बनगे, अमरीत कस दारु ढ़रकावथे।
पीये बर नइ पावय पइसा, धान कोठी ल टोड़कावथे।
बुधारु ल कहें ठंडा पियादे, एक रुपिया नीये गुनगुनावथे।
दरुहा के संगवारी बर, फटफटी भट्ठी दउड़ावतथे।
अइसन जुग आ गय,आनी-बानी के होवथे।
बच्छर भर नइ होय बिहा, बहू सास ल डरवावथे।
ठेला म नइ दिखे पान, कोनो अब नइ खावथे।
लइका सियान तको, गुटका राजश्री चबलावथे।
पचर-पचर थूक-थूक, सफ्फा जगा ल ललियावथे।
भात साग के सुवाद नी पाय, खात-खात सुसवावथे।
अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
पढ़े लिखे म चेत नइये, मया के रद्दा जोहथे।
भाटा पताल गोभी करेला, बायलर कस उपजावथे।
पचर्रा होगे साग भाजी, थोरको घलो नइ मिठावथे।
बइला भंइसा होगे कमती, नांगर दंवरी नइ फंदावथे।
हंसिया कुदारी पजावत नइ, ट्रेक्टर हार्वेस्टर म मिसावथे।
अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
चिठ्ठी पाती के शोर नइये, बड़ मोबाइल म गोठियावथे।
अउ का कहिबे संगी मोर, सबो परिया पोगिरीयावथे।
गाय गरुवा के चरागन बिना, गऊ माता मन बेचावथे।
गुदूम डफरा गम्मत नी दिखे, डीजे धमाल बजात नाचथे।
सातुल इभ्भा भिर्री गंवागे, किरकेट ल जम्मो भावथे।
अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
डवकी सियान फेर मरे बिहान, डवका मुड़ धरके रोवथे।
घानी जाँता ढ़ेकी लुकागे, रंगे-रंग के मशीन आवथे।
धान कुटे ल छुटे हालर, ट्रेक्टर घरे पहूँच जावथे।
टूरा लइका अलाल होगे, मारे पीटे बर डंडा खोजथे।
टूरी लइका बेटा बनके, अपन दई ददा ल पोसथे।
सित्तोन नइये सत के राज, झूठ लबारी ल पतियावथे।
सुरता म मोर 'आँसू 'निकले, जम्मो चीज हर नंदावथे।

         रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
           मो. - 9165720460
                  7770989795