Sunday, 13 June 2021

गजल (प्रेम अगन)

प्रेम अगन
मापनी - 221  2122  221  2122

वादा सजन मिलन की, अब मात हो रही है।
नित रोज आपसी में, हर बात हो रही है।

दिल दूर हो न डर की, आँसू लगे बहाने।
मन रोग चाहतों की, दिन रात हो रही है।

मिलते रहे सदा ही, छोड़े नही तराने।
बाहें नही छुड़ाओ, बरसात हो रही है।

साथी मिला मूझे तो, खुद रो रहा खुदा भी।
हमराह हौसले में, प्रतिघात हो रही है।

तूफान है हृदय में, जो भी करे जमाने।
मिट जायें प्यार में हम, खट दाँत हो रही है।

आँसू कहे सभी से, जाएँ वही ठिकाने।
जिस वादियाँ सुहानी, दिन रात हो रही है।

रचना :-
तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
मो. - 9399169503
इमेल - aansukai4545@gmail.com

छत्तीसगढ़ी करमा गीत (हाय रे मोर उलुहा पान)

लड़का - 
हाय रे ss हाय रे ss हाय रे हाय रे हाय
हाय रे मोर उलुहा पान, जइसे लुरे बाली कान
(तन म भरे साँस समान)
हाल डोल के तँय ह हरियाबे
हाल डोल के तँय ह हरियाबे sss येsss
हाल डोल के तँय ह हरियाबे।

लड़की -
हाय रे ss हाय रे ss हाय रे हाय रे हाय
हाय रे मोर कुंवर पान, बन अंतस बसे परान
कभू झिन न तँय ह अइलाबे
कभू झिन न तँय ह अइलाबेssss येsss
कभू झिन न तँय ह अइलाबे।

अंतरा :- लड़का -
तोर बिना जिन्गी सूना , तोला मँय बचाहूँ या -2
पुरवाही लेहे बर , तोला मँय जगाहूँ या -2
जिया नहीं जाय रे, तन थरथराय रे ss हाय रे sss
हाय रे मोर उलुहा पान, जइसे लुरे बाली कान।
हाल डोल के तँय ह हरियाबे।

लड़की - 
राख लेबे मोला बने, संग देहूँ तोर छांव गा -2
सेवत रहिबे मोला बने, रंग लेहूँ मोर नाव गा -2
मया रच जाय रे, जिन्गी तर जाय रेss हाय रेsss
हाय रे मोर कुंवर पान, बस अंतस बसे परान।
कभू झिन न तँय ह अइलाबे।

लड़का - हाय रे मोर उलुहा पान, जइसे लुरे बाली कान।
            हाल डोल के तँय ह हरियाबे।
लड़की - हाय रे मोर कुंवर पान, बन अ़तस बसे परान।
            कभू झिन न तँय ह अइलाबे।
लड़का - हाल डोल के तँय ह हरियाबे।
लड़की - कभू झिन न तँय ह अइलाबे।

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रचना :- तेरस कैवर्त्य "आँसू"
           सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
          जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
          संपर्क नं. - 9399169503, 9265720460
         ईमेल - aansukai4545@gmail.com

Saturday, 12 June 2021

मोह दारे मोर रानी

लड़का - 
तोर मीठ बोली मोला मोह दारे मोर रानी sss
अइसे का जादू डारे मन मा तँय मोर दीवानी।
पातर कनिहा मटका देहे न, 
रेंगते रेंगत अँखिया देहे ना ss
कइसे मता दारे पीया के महुंआ के पानीss
तोर मीठ बोली मोला मोह दारे मोर रानी।

लड़की -
जेती जाथव तिहाँ काबर जाथस रे मोर पाछूsss
कभू बेड़हा रेंगे कभू तीर - तीर रे मोर आघू
लूका - लूका मोला तँय देखे ना,
घोर गली जब -जब भेंटे गाss
मँय मया नी जानव जारे जा लफाडूsss
जेती जाथव तिहाँ काबर जाथस रे मोर पाछू।

अंतरा :- लड़का -
चंदा कस तोर सुरतिया, अंजोरी रस्ता बताथे ओ।
होंठ के लाली माथ के बिंदिया अब्बड़ मोला सुहाथे ओ
मुचमुच ले तोर हँसना, जिवरा ल बड़ धड़काथे ओ।
सुरता म तोर नींद नई आवे रथिया रथिया जगाथे ओ।
बोली बचन सुन ले, अब तो गोरी मोला चुन ले।
मोर बसे हस अंतस म, तँय समाये हस नस-नस मsss
एके हो जाथेन दुनो परानीss
तोर मीठ बोली मोला मोह दारे मोर रानी।

लड़की -
करथस का अब्बड़ मया, मोर घर सगा ले आजा गा।
दाई ददा ल मनाई लेबे, लाबे बराती संग बाजा गा।
मड़वा म भांवर परा ले, हो जाहूँ तोरेच चिन्हारी रे।
जनम भर आधार बन तँय, मँय तोर मया के नारी रे।
मोला कभू झिन भूलाबे, आँसू कभू झिन बोहाबे।
जिन्गी हे तोर बस मा, हिरदे म भर ते रसना sss
मँय बन जाहूँ चखना, तोर बर रे मोर मयारु।
जेती जाथव तिहाँ काबर जाथस रे मोर पाछू।

लड़का - तोर मीठ बोली मोला मोह दारे मोर रानी।
            कइसे मता दारे पीया के महुंआ के पानी।
लड़की - जेती जाथव तिहाँ काबर जाथस रे मोर पाछू।
            मँय बन जाहूँ चखना तोर बर रे मोर मयारु।
लड़का - कइसे मता दारे पीया के महुंआ के पानी।
लड़की - मँय बन जाहूँ चखना तोर बर रे मोर मयारु।

गीतकार :- 
तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
मो. - 9165720460, 9399169503
इमेल - aansukai4545@gmail.com


Friday, 8 January 2021

दोहा (शपथ))

शपथ करो तुम आज से, रख भारत की मान।

सदा तिरंगा सज रहे,  जाये चाहे जान।।

जाप शपथ से ही करें,  बोलो जय श्री राम।

मंदिर तो बन के रहे,  बने स्वर्ग का धाम।।

पेड़ लगाओ दुख हरे,  शपथ करो जन एक।

स्वच्छ रखो जल नभ जमीं, काम करो सब नेक।।

अनुज शपथ मन तन करो, नशा मुक्त रह आज।

नारी नर की तन बसे,  रखो धरा की लाज।।

मातु पिता पग पग बसे, बनते सुख के धाम।

भरे अग्नि देवा शपथ, सदा सुहागन दान।।


स्वरचित - तेरस कैवर्त्य "आँसू" सोनाडुला




Friday, 9 October 2020

शोषण (दोहा छंद)

 बेटी की रक्षा करो, हे मानव संसार।

सदा इसे सम्मान दो, देवी का अवतार।।1।।


शान रही है देश की, देती क्यूँ बलिदान।

राम श्याम अब आ बचा, भारत माँ की आन।।2।।


रहे दुशासन आज भी, रावण छीनें लाज।

बाँहें उनके काट दो, बसा राम की राज।।3।।।


खून सनी फिर से धरा, लूट रहे हर बार।

आदि शक्ति अब तो कुदो, उठा खड़ग तलवार।।4।।


चमत्कार ऐसा करो, माँ कलियुग में लौट।

मौत सजा दे कर रहो, ढ़ोगी छुपे मुखौट।।5।।


तेरस कैवर्त्य "आँसू"

सोनाडुला (बिलाईगढ़)

जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)




रोला छंद (बाबुल)

                  (1)

मेरा बाबुल रोज, गोद ले लोरी गाता।

मीठे - मीठे बोल, कहानी खूब सुनाता।

पूरा कर अरमान, ज्ञान की बगिया बोंंये।

करके कन्या दान, नयन से नीर भिगोये।

                  (2)

बाबुल प्यारे आप, मुझे लिख पढ़ा सिखाया।

बड़े प्रेम के साथ, चाँद सी रूप सजाया।

लगी एक मैं बेल, बाग की आँगन तेरा।

सुना सुना कर मेल, पिया घर संग सबेरा।



तेरस कैवर्त्य "आँसू"

सोनाडुला (बिलाईगढ़)

जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)



मनहरण घनाक्षरी (नारी)

 नारी जब हँस खुश, फूल झरे मन भीत,

जब कही रूठ गयी, आँखें तो दिखाती है।

नारी है घर की लक्ष्मी, बनी नर की अर्धांग,

चूल्हा चौका कर वही, भोजन खिलाती है।


मन मे रच कविता, जोड़ी राम और सीता,

अपने नसीब मिले, गोरी है या काली है।

कुछ तो है पढ़ी लिखी, कहती है आप बीती,

जैसी हो करीब रहे, खूद घरवाली है।


जिस पर प्रेम लगे, रात दिन खूब जगे,

पिया की झलक एक, पाने को लुभाती है।

भूखे प्यासे व्रत करे, पति की लंबी उमर,

नारी को वंदन करूँ, सच्ची दिलवाली है।


कभी बेटी कभी बहू, बन जाती कहीं सास,

घर छोड़ती अपना, सभी को रुलाती है।

सहन टुटते जभी, बढ़ते है अत्याचार,

देवी शक्ति बन ठान, त्रिशूल उठाती है।


तेरस कैवर्त्य "आँसू"

सोनाडुला (बिलाईगढ़)

जिला - सारंगढ - बिलाईगढ़ (छ. ग.)