Wednesday, 29 November 2017

* हाइकु *

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 25/05/2016
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(1) कल्पना कर
     भावविभोर शब्द
     सजा सुलेख।

(2) पल कीमती
      ना बितायें फिजूल
      सवाल पर।

(3) रोशन कर
      जल कर दीप सी
      सहज ताप।

(4) जीवन पथ
      चल हमसफर
      कदम मिला।

(5) आदर भाव
      तले कर कमल
      सेवक बन।

(6) प्रकृति बचा
      वृक्ष लगा पहल
      जन सुझाव।

(7) संस्कृति साख
      चल अमल कर
      कर साकार।

(8) अशिक्षा सभी
      समस्या का जड़
      उखाड़ फेंक।

(9) पढ़ो पढ़ाओ
      गढ़ विकास पथ
      भारत देश।

(10) छुपती नही
        झूठ की राज दोष
        खुलती पोल।

(11) जमाना गोल
        तारीफ ईमान की
        सभी सताते।

(12) मन भटके
        नशा पान में चूर
        जान की नाश।

(13) भ्रामक फैला
       अराजकता बाँट
        नेता का चाल।

(14) घमण्ड तोड़
        अंत सब शरीर
        जरुर कल।

(15) पावन भूमि
        है दक्षिण कोशल
        शोभित वादी।

(16) महके फूल
        कुटुम्ब की आँगन
        बहे पवन।

(17) लघु आकार
        दो सीमित संतान
        सुखी आधार।

(18) तुरंत काम
        कल पल न लौट
        है फिर चूक।

(19) हौसला रख
        लक्ष्य पूर्ण सफल
        प्रेम लगन।

(20) मातृ पितृ है
        जो बढ़कर देव
        कोई न दूजा।

(21) जीवन काल
        गृह वस्त्र भोजन
        पुत पालन।

(22) नीर निर्मल
        बचाव जीने योग
        जन जीवन।

(23) गीत संगीत
        सुकून मन भार
        सुर मे ताल।

(24) कर सफाई
        पूर्व मे शौच बाद
        बीमार मुक्त ।

(25) अनेक रुप
        सुता भगिनी माता
        जोरु तमाम।

(26) मेरा वतन
        धन्य उसे सलाम
        वीर शहीद ।

(27) करके योग
        प्रातः संध्या समय
        बनें निरोग।

(28) तन अमूल्य
        मिलकर रहना
        मधुर बोल।

(29) ठंडी बढ़ती
        सन्नाटा रात लेके
        गरम वस्त्र ।

(30) भोर किरण
        सुखदायक रहें
        समस्त प्राणी ।

(31) सफर घड़ी
        जीवन संघर्ष है
        मेला की बेला।




          स्वरचित - तेरस राम कैवर्त्य (आँसू )
                   सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार - भा. पा. (छ. ग.)
                        पिन - 493338
        मो. - 9165720460, 7770989795

     



Monday, 20 November 2017

*जान लेवा होगे*

Created by- Teras Kaiwartya(Aansu)
Date - 06/07/2017
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आनी बानी के सुख सुविधा ।
परगे करे ले अब्बड़ दुविधा ।
थोरकिन जांगर नइ चलाय।
निचट लघे फटफटी कुदाय।
सोर नीये चलाय के ढ़ेंसा गे ss
बहू बेटी बेवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

पान के पतरी सबो नंदागे।
जम्मो जगा प्लास्टिक छागे।
दूध दही घी नइ तो भावय।
कुकरी छेरी चबंदे खावय।
दारु घर म झगरा मचा के ss
अब पंच मेवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

बहू बिहाये चिक्कन चान्दो।
सास ससुर नाचय दहिकान्दो।
दाई ददा ल बेटा  गुर्राये।
बहू के तीर म गुड़ लपटाये।
नौ महीना ले पेट सिरजा के ss
महतारी बाप भेवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

साग भाजी धान भारी उपजे।
महुरा जहर दवई ल छीचय।
जेखर सेती बड़ बीमारी होथे।
दुख पीरा म बड़ घर भर रोथे।
बाचय जभे ईलाज करा के ss
डाक्टर बाबू देवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

गिन बिन कचरा करव सफाई।
रुख राई झिन तो करव कटाई ।
झिन कर गरब भइया नखरा।
बन जाही हमर बर खतरा।
प्रदूषण ल दूर करा ले ss
ये तो घर लेवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

     स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
        सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
   जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
     मो. - 9165720460
            7770989795

Monday, 6 November 2017

" मोर छत्तीसगढ़ "

Created by :- Teras Kaiwartya(Aansu)
Date : 05/07/2015 *छत्तीसगढ़ी गीत* (पारंपरिक)
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B-मोर छत्तीसगढ़ मइयां।
    परथंव मंय तोरे पइयां।
    बासी के खवइया मइयां हो sssss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। होsss मइयां हो
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
G- मोर छत्तीसगढ़ मइयां।
     परथंव मंय तोरे पइयां।
     बासी के खवइया मइयांं होssss
     सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो ss मइयां हो
     हरियर अँचरा नीक लागे न।
B- सुवा पंथी करमा ददरिया, नाचा मन ल भावय ग।
    झांझ मंजीरा घुँघरु मांदर, संगे संग सुनावय ग ।
    नाचे कलगी मुड़ म खोंचे।
    गौरा गौरी मुड़ म बोहे।
    धोती कुरता म रउत नाचय sss
    पंडवानी के गवंइया। मइयां हो ss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो मइयां हो ss
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
G-मेहनत मंजूरी खेती किसानी, जिन्गी भर ले करना हे।
    पोइल्का लुगरा ककनी बहुंटा, रंगे रंग के गहना हे।
    टोरे नहना चला के जांगर,।
    खांध तुतारी धरके नांगर।
    कुकरा बासत उठ के बिहना sss
    मुखारी के घसइया। मइयां हो ss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो मइयां हो ss
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
B-नरवा नदीया डबरी तरिया, निरमल पानी बोहावथे।
    छत्तीसगढ़ के कोरा म, मोंगरा गोंदा महमहावथे।
    राम के शवरीन दाई जिहाँ।
    जगा जगा महामाई इहाँ।
    नदिया तीर तीर डोंगरी तीर तीर sss
    जन्मे नारायण वीर बिलासा। मइयां होss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो मइयां हो ss
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
G- घासी बाबा जन्मे जिहाँ, मोर गिरौदपुरी धाम हे।
    सत के सादा धजा फहरे, बड़े देश के जैत खाम हे।
    यही माटी म कबीर कुटिया।
    अउ बिराजे बाबा बिरितिया।
    दया बरसे देश के भुइयाँ sss
    आँसू पोछत हावे कर्मा। मइयां हो ss
    सुग्घर बोली मीठ लागे ना। हो मइयां हो ss
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
G-बरा ठेठरी खुरमी सोहांरी, गुरतुर पाग के अइरसा हे।
    चना मुर्रा लाडु चबनिया, चटनी संग पेज पसिया हे।
    भरे खजाना राज हमर म,।
    डोंगरी झाड़ी फबे डहर म।
    सिरजे हवय हीरा भाखा sss
    ढ़रथे मया अउ पिरीतिया।मइयां होss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो मइयां हो ss
    हरियर अंचरा नीक लागे न।
B- मोर छत्तीसगढ़ मइयां.. ....
G- मोर छत्तीसगढ़ मइयां ....

    गीतकार - तेरस राम कैवर्त्य (आँसू )
          सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
      जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
         मो.- 9165720460
                7770989795
  email : aansukai4545@gmail.com

Wednesday, 1 November 2017

* ददरिया *

Created by : Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 12/09/2016   * ददरिया *
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लड़की- देख तोला जियरा धक ले करथे ग
           अइसे काये जादू डारे तँय मोहना
           मन बैरी तुही ल खोजथे संगवारी।
           काये होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे तंय ह झुमर जाबे ,
           नरवा के खड़ झूलना झूले बर आबे न।
लड़का- पैंरी के धुन म तोर होयें बइहा ओ
           पाछू पाछू तोर रेंगेव ओ टूरी
           मया तरी छइंहा ओ संगवारी।
           काये होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे मंय ह झुमर जाहूं ,
           नरवा के खड़ झूलना झूले बर आहूं न।
लड़की- आरो ल पाके तोर सजथव मंय ह ग
           टिकली फुंदरी संग बेनी गथाके
           देखे बर निकलथव मोर राजा।
           काय होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे तंय ह झुमर जाबे ,
           नरवा के खड़ झूलना झूले बर आबे न।
लड़का- कनिहां के करधन म मोला बांध ले
           सुख दुख के गठरी ल छोर
           सुग्घर बांछ लेबो मोर रानी।
           मया होगे मोला, तोला सुररथव।
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे हमन झुमर जाबो ,
           नरवा के खड़ झूलना म झूले बर आबो न।
लड़की- मया होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे हमन झुमर जाबो ,
           नरवा के खड़ झूलना म झूले बर आबो न।
लड़का- मया होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे हमन झुमर जाबो ,
           नरवा के खड़ झूलना म झूले बर आबो न।
दोनो -   कांसी फूलगे हमने झुमर जाबो ,
           नरवा के खड़ झुलना झूले बर आबो न ss -3
         



        गीतकार - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
            सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
          मोबा. - 9165720460

Thursday, 26 October 2017

* झुमर ले झुमर ले *

Created by : Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :27/05/2007    (करमा गीत)
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लड़का-  हो हइया हो हइया हो sss
            हइया हइया हइया हइया हो ss
            झुमर ले झुमर ले, घुमर रे घुमर ले
            झुमर ले झुमर ले, हे हेsss
            करमा के डार म तय आना। ये गोरी ss
            मोर संग मन ल मिलाना। - 2
लड़की- झुमर ले झुमर ले, घुमर ले घुमर ले
           झुमर ले झुमर ले, हे हेss
           करमा के डार म तय आना। ये छोरा
           मोर संग नैना लड़ाना - 2
लड़का- मया के दीया तंय बार देबे ओ
           अंतस म मोला तंय उतार लेबे ओ }-2
           मांदर के ताल घुमरे, मात के नाच किंदरे
           तरी-तरी करमा ल सुमर ले ss
           झुमर ले रे
           करमा के डार .....
           झुमर ले झुमर ले....
           करमा के डार म ....
           मोर संग मन ल ....
लड़का- हिरदे के बात तंय बता दे न ओ
           मोर नाम के मेंहदी तंय रचा ले न ओ}-2
           मड़वा म करमा के, होबे नइ सरमा के
           हरदी तेल तन म चुपर ले ss
           झुमर ले रे
           करमा के डार म...
           झुमर ले झुमर ले ...
           करमा के डार म ....
           मोर संग मन ल ....
लड़की- मया बांधे करमा म जोहार लेबे गा
           झिन छुटे संग मया ओगार लेबे गा  }-2
           आ न मोर गोठ सुनले, कले चुप सोज गुनले
           भर दे माँग सेंदुर मोर उमर ले sss
           झुमर ले ग
           करमा के डार ....
           झुमर ले झुमर ले...
           करमा के डार म ....
           मोर संग नैना .....
लड़का- झुमर ले झुमर ले, घुमर ले घुमर ले
           झुमर ले झुमर ले। हे हेsss
लड़की- करमा के डार .... मोर संग नैना .....
लड़का- करमा के डार .... मोर संग मन ......



        गीतकार - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
       जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
          मो. - 9165720460

         


   
       


* नइ निहारे काबर ओ *

Created by:- Teras Kaiwartya(Aansu)
Date : 10/10/2017 (छत्तीसगढ़ी गीत)
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ल. - नइ निहारे काबर ओ निर्मोही !
       लहुट के चिटकन मोला नइ निहारे काबर न।
       नइ निमारे काबर ओ निर्मोही !
       गोटी माटी के संग ल नइ निमारे काबर न।
       गुरतुर बोली ठिठोली, खेले आँखी मुंदवली - 2
       मुसकाई के मंधरस ढ़ारे काबर ओ sss
       नइ निहारे काबर न ...
       नइ निहारे काबर ओ निर्मोही
       लहुट के चिटकन मोला नइ निहारे काबर न - 2
ल.-  नइ निहारे काबर गा जोही तंय !
       लहुट के चिटकन मोला नइ निहारे काबर न।
       नइ निमारे काबर गा जोही तंय !
       गोटी माटी के संग ल नइ निमारे काबर न।
       कइसे नजर लगाये, अइसे बान चलाये - 2
       तोला देखे बिना मन नइ भाये काबर न।
       नइ निहारे काबर न....
       नइ निहारे काबर ....
ल.- अंतस म मया के बिजहा, बोयें तंय मयारु मोर -2
      हांसी के पानी पलो के, करे तय चिन्हारी मोर - 2
      हरियर पीका उलहाये, फेर नइ तो सिरजाये -2
      बिरवां जगे जगाये ल मुरझाये काबर ओ sss
      नइ निहारे काबर न...
      नइ निमारे काबर ओ जोंही
      गोटी माटी के संग ल नइ निमारे काबर न - 2
ल.- चंदा कस तोर सुरतिया, आँखी हावय जोगनी मोर -2
      चमकत तोर सुघराई, राखे हावंव भीतरी मोर - 2
      कचरा मोला बनाके, निचट मुंह ओरमा के - 2
      बदरा म गंवा के मिंझारे काबर ओ sss
      नइ निमारे काबर न...
      नइ निहारे काबर ओ निर्मोही
      लहुट के चिटकन मोला नइ निहारे काबर न -2
ल.-उबुक चुबुक होके जीथव, जिन्गी भर तोर सुरता म-2
    जिया मोर चुरत रइथे, तोला नइ पाये के बिरथा म-2
    होगेंव मुरदा बरोबर, सुरता म तोरेच बर -2
    देखे बर नोहर कती लुकाये काबर ओ sss
    नइ निहारे काबर न...
    नइ निहारे काबर ओ निर्मोही
    लहुट के चिटकन मोला नइ निहारे काबर न -2
    नइ निमारे काबर ओ निर्मोही !
    गोटी माटी के संग ल नइ निमारे काबर न - 2
    लहुट के चिटकन मोला नइ निहारे काबर न...
    गोटी माटी के संग ल नइ निमारे काबर न...


     गीतकार - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
         सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
    जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
      मो. - 9165720460



   



Tuesday, 12 September 2017

* क्या करें ? *

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 13/06/2017
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किसको फरियाद करें हम दर्दे दिल की हाये!
अपना गम लेकर कहीं और ना जाया जाये ।

अक्सर प्यार का मारा जाम को दवा बनाते हैं।
किस तरह जख्मों पर मरहम लगाया जाये ।

उजड़ गया बसता हुआ प्यारा सा आशियाना ।
खटकती रहती हैं जिंदगी कैसी सँवारी जाये ।

झूठी कसमें वादा झूठा दिलासा ऐसा क्यों दिया ।
बस दुख ही और न कुछ ऐसी न प्रेम पाला जाये।

न करो किसी से सलूक ऐसी काँटें की चुभन ।
सफर में हमसफर बन हंसी लम्हें बिताया जाये।

तिल तिल घूँट घूँट कर तन तिनका ना बना।
अपने झरते आँसूओं को कैसे संभाला जाये।

अब दिल की धड़कन में तड़पना कैसे छोड़कर ।
उमंग भरी नया दौर नया मोड़ कैसे लाया जाये ।

  स्वरचित :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
      सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
  जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
     मो.- 9165720460






Sunday, 20 August 2017

* स्वच्छ भारत अभियान *

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 12/12/2016
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भारत के जन हित सजे , 
          सुख संगम बनाना है ।
गंगा यमुना जल की भाँति , 
          निर्मल धारा बहाना है ।
मेरा भारत स्वच्छ बनाना है ।
सारे जग से उँचा उठाना है ।

कसम है अपनी माता की ,
        दस पेड़ लगाओ भ्राता ।
जलन बुराई छोड़ हम सब ,
         कर लें जतन की नाता ।
जागरुकता की श्रम अर्पण से ।
मेरा भारत मस्त बनाना है ।
मेरा भारत स्वच्छ बनाना है ।
सारे जग से उँचा उठाना है ।

वृक्ष जड़ें धरा पर जकड़े ,
          होते नियंत्रण मृदा क्षरण ।
हरियाली छाती उपवन में ,
          करते हैं जो विश्व भरण ।
मुक्त हो जाये घिरे विपदा से ।
बूँद -बूँद जल बचाना है ।
मेरा भारत स्वच्छ बनाना है ।
यह फर्ज हमें निभाना है ।

कोख मे भी पलती बिटिया ,
          ये देख आश लगायें है ।
जीने की तमन्ना वतन में ,
          पर संकट से घबरायें है ।
हंसी से खिलती वह पढ़ेगी ।
शौचालय घर में बनाना है ।
मेरा भारत स्वच्छ बनाना है ।
सबको यह लक्ष्य अपनाना है ।

ना ढ़ेर करो कचरों का ,
          साफ रखें अपने आसपास ।
बनाकर गढ्ढे में ही डालें ,
          बनायें उन्नत जैविक खाद ।
उपाय ऐसे कर जीवन से ।
महामारी को भगाना है ।
मेरा भारत स्वच्छ बनाना है ।
सारे जग से उँचा उठाना है ।

इसी में जन्में हम सब प्राणी ,
          इस मिट्टी के सब खिलौने ।
इनको नही छेड़ो तोड़ो ,
          ना बने गमों के बिछौने ।
महके पुष्प सुखमय वादी ।
ऐसा गुलशन यहीं सजाना है ।
मेरा भारत स्वच्छ बनाना है ।
सारे जग से उँचा उठाना है ।

मेरा भारत स्वस्थ बनाना है ।
अंबर में तिरंगा फहराना है ।

    स्वरचित :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
       सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
      मो. - 9165720460,
              7770989795




Monday, 31 July 2017

** प्रकृति दशा **

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 03/01/2016
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    मानव स्वयं विनाश को तुले हैं।
    जानकर भी अनजान बन भूले हैं।

    वनों का हो रहा है दोहन ,
    जीवों का हो रहा है पतन ।
    हरियाली सिमटने लगी है ,
    पर्यावरण बिगड़ने लगा है ।
    ध्यान करो ये जीवन का झूले है।

    पर्वत नदी झील बदल रही है ,
    शनै: शनै: भूमि निगल रही है ।
    अत्यंत प्रदूषण अब जकड़ रहा है ,
    आलम है विष चहुं पनप रहा है ।
    संवारे वादी को फिर क्यूं सुले है ।

    प्रसाधन की अब अंबार लगी है ,
    कचरो की देखो बाढ़ लगी है ।
    प्रतिपल संकट बना हुआ है ,
    जल का स्तर में कमी हुई है ।
    समाधान के बजाय रंग मे घुले है।

    निरंतर रही खिलवाड़ प्रकृति की ,
    कांप रही भू रुदन क्षितिज भी ।
    संतुलन बिगड़ विकराल हो जाती ,
    धन-जन का जो विनाश कर जाती ।
    विपदा से जीवन फिर क्यूं रुले है ।

    स्वार्थी मनमाने नशा पान करे ,
    स्वयं को भव से राम नाम करे ।
    अचरज देख मुख फफक पड़े है ,
    "आँसू " की बूंदें जब टपक पड़े है ।

    मानव स्वयं विनाश को तुले है ,
    जानकर भी अनजान बन भूले है ।
    निर्मल हो भू-अंबर , वृक्षारोपण लगायें ,
    क्षति मुक्त हो जग , सभी प्राणी बचायें।

    रचनाकार :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
         सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
    जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
    मोबा.- 9165720460, 7770989795

Sunday, 30 April 2017

*मैं हूँ मजदूर*

Created by : Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :01/05/2013
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मैं हूँ मजदूर।
कभी बेबस लाचार ,
फिरता हूँ फूटपाथ पर।
और कहीं कुचों गलियों में ,
तो कहीं अंधेरी रात पर।
दुनिया का है दस्तूर , 
मैं हूँ मजदूर।

      फटे कपड़े लपेटे हुए ,
      निकलता जब काम पर।
      खून पसीना बहता तन से ,
      थका हारा सो जाता रात पर।
      अपना जीवन है हुजूर  ,
      मैं हूँ मजदूर।

नहीं मेरा ठौर ठिकाना ,
कभी यहाँ - वहाँ तलाश पर ,
काँटे कील चोट लगता है ,
कराहता हूँ रात जाग कर।
पीड़ा से हूँ चुरचुर।
मैं हूँ मजदूर।

      औरों की महल बनाता ,
      मजबूत बाहों की नीव पर।
      निकालता पानी पत्थर से ,
      परिश्रम से खीच कर।
      पर निर्धन हूँ जरुर ,
      मैं हूँ मजदूर।

मेरा बसेरा घास फूंस की ,
सकुटुम्ब रहते घुँस कर।
दीन की व्यथा कोई न जाने ,
सहते हैं टूट -टूट कर।
ना कोई मुझे गुरुर ,
मैं हूँ मजदूर।

      प्रणाम मेरा ईश्वर को ,
      बनाया मजदूर इस जनम पर।
      अस्थि भी मेरा काम आयें ,
      बज्र बनके कलंक पर।
      बस यही है जुनून ,
      मैं हूँ मजदूर।

कसम है माँ भारत की ,
मिट जाऊं इस मिट्टी पर।
दुश्मन से चट्टान बनके ,
गिर जाऊं उसके बस्ती पर।
अंतिम जीवन का है उसूल ,
मैं हूँ मजदुर।

            रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
              सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
         जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
            मोबा.- 9165720460
   

Saturday, 29 April 2017

*नवां जुग के उदीम(दोहा)*

Created by : Teras Kaiwartya(Aansu)
Date : 16/01/2016
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अइसन जुग आय भइया, काय-काय होवथे।
लइका ह सियान बनके, बाप ल सीखावथे।

दुध दही महुरा बनगे, होगे अमरित दारु।
पी पी के चोर होगे, किंदरत हे लफाड़ु।

ठेला म नइ दिखे पान, कोनो नइ खावथे।
लइका अउ सियान तको, गुटका चबलावथे।

भाटा पताली गोभी, बयलर कस उपजाय।
का होगे साग भाजी, सिरतोन नइ मिठाय।

गाय बइला कम होगे, दौरी डोर नी दिखे।
खेत ट्रेक्टर म जोते, हार्वेस्टर म मिसे।

चिठ्ठी पाती नइ आय, मोबाइल ह छागे।
मिनट म गोठ हो जाथे, तन मन ह हरियागे।

ना गुदुम डफरा गम्मत, डीजे झम नाचथे।
सातुर भिर्री गंवागे, क्रिकेट सब भावथे।

घानी जाता लुकागे, नवां मशीन ह आय।
बफर सिस्टम के पार्टी, ठाढ़े होके खाय।

बाप के जियत म बेटा, मेछा तक ल मुड़ाय।
जोहार पलगी भूलय, नमस्ते मे हियाय।

टूरा मन अलाल होय, मारय लउठी खोज।
टूरी मन बेटा बनय, दइ ददा ल अब पोस।

सिरतोन सत के राज नही, लबारी ल पतियाय।
सुरता म आँसू निकले, जमो चीज नंदाय।

          रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
         मोबाइल - 9165720460

Sunday, 23 April 2017

* तांत्रिक *

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 10/12/2016
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ईष्ट देवी प्रतिपल बल साधक ,
शक्ति प्रदत्त उत्सुक मन उमंग।
क्लेश द्वेष खण्डित भय मुक्ति ,
सुखद समृद्धि स्वयंभू जन प्रसंग।

      आराध्य पूर्ण तल दीप पुंज ,
      रक्त रंजित प्राण तन बलि।
      तंत्र मंत्रोच्चार कारक ध्वनि ,
      दृश्य यज्ञ प्रविष्ट उत्पन्न काली।

क्रुरता निर्मम यत्र वध आहुति ,
स्वार्थ सिद्धि नित कपट चरित्र।
अंधविश्वास रुढ़िमत व्यापित ,
भ्रमित निर्दोष लिप्त विचित्र ।

      नरसंहार भांति क्रियाशील दानव ,
      रुप विकराल वेश खल तांत्रिक।
      खिलवाड़ चमत्कार प्रकृति विद्या ,
      कलंकित आदमखोर मृत्यु दण्डित।

आर्थिक लोलुप रचाकर व्यवसाय ,
गमन लूटपाट चर्चित नाम दाम।
समूह विकट चहुँ जाल सृजनशील ,
अद्भुत मायाशक्ति कमाल विज्ञान।


      रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
        सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
    जिला :- बलौदाबाजार (छ. ग.)
        मो. :- 9165720460

Sunday, 2 April 2017

* अब्बड़ घाम ददा *

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 01/03/2017, * अब्बड़ घाम ददा *
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अब्बड़ घाम ददा !
पंछा मुड़ म ढ़ाँक ले।
अब्बड़ घाम सगा !
रद्दा थोकिन झाँक ले।

नंगत बेरा ल झिन रेंग ,
      भाजी कस अइला जाबे।
गोंदली धर ले संग म ,
      नइ तो निचट झोला जाबे।
अब्बड़ घाम ददा !
पानी भर डब्बा राख ले।

पानी जुच्छा झिन बोहा ,
      बूंदी - बूंदी सकेल जतन।
जी ल राखे बर पानी पीयाउ ,
      हावय संगी मन हीरा रतन।
अब्बड़ घाम ददा !
गुन ले हाट के आत ले।

चिरइ चिरगुन पियास हावय ,
      छानही ऊपर रख देवा पानी।
पुन के बुता कर मइन्खे ,
      बनव झिन कर आनाकानी ।
अब्बड़ घाम ददा !
कुहकही आत चउमास ले।

दही आमा कुसियार रस ,
      पी - पी के देह ल जुड़ावा।
दारु मंउहा झिन पियव ,
      अउ झिन मुड़ ल मुड़ावा।
अब्बड़ घाम ददा !
बने लागथे नहात ले।

जादा पानी पी भाजी पाला खा ,
      नान्हे लइका कस रुख ल जगा।
जुढ़हा सुग्घर छइंहा दिही ,
      जम्मो कोती सफ्फा उदिम करा।
अब्बड़ घाम ददा !
बने फरिया के बाछ ले।

गरीब कमीया मन बर ,
      का घाम अउ का छइंहा।
खटे जांगर चलाथ रथे ,
      अपन परिवार ब तुमन सइहा।
अब्बड़ घाम ददा !
पसीना ओगारथे कमात ले।

अब्बड़ घाम ददा !
शुरु हो जाथे पहात ले।


        रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
          सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
      जिला  - बलौदाबाजार (छ.ग.)
       मोबाइल - 9165720460
  email : aansukai4545@gmail.com



   

Wednesday, 8 March 2017

* दर्द विदाई की *

Created by :- Teras Kaiwartya(Aansu)
Date :- 15/01/2017
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दिल में छुपा रखना मेरी यादें, दिल में छुपा रखना।
मन से हटा रखना फरियादें, मन से हटा रखना।
जहाँ भी जाओ, हमें ना भुलाओ।
यही सोच जगा रखना।

ओझल हो रहें पलकों से, इतने पलों के नयनों से।
पीड़ा भरी इन फासलों से, छिपने लगे है आइनों से।
नजरें सदा तुम्हें ढूँढ़ती रहेगी। दिल में बसा रखना।

आँसू की धारा निकलने लगी, अपनों से अब बिछड़ने लगी।
शोर तुम्हारे सिमटने लगी, जोर से धड़कन धड़कने लगी।
आवाज कानों में गूँजती रहेगी। दिल में बिठा रखना।

दूआएँ हमारी है सभी को, ना लेना दिल में कमी को।
लक्ष्य में अविरल चलते रहें, रुकना नही आगे बढ़ते रहें।
गैर साबित ना ही करेंगें। दिल में लगा रखना।

दिल में छुपा रखना मेरी यादें। दिल में छुपा रखना।
मन से हटा रखना फरियादें। मन से हटा रखना ।
जहाँ भी जाओ, हमें ना भुलाओ।
यही सोच जगा रखना।

रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
मोबाइल :- 9165720460

Tuesday, 10 January 2017

* छत्तीसगढ़ के कोरा *

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 01/01/2017
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मोर छत्तीसगढ़ के माटी हावय ,
धान के कटोरा।
अही म देवता धामी बिराजे ,
जिहां होथे मेला।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

भुइंया कोड़ - कोड़ ओल बनाये ,
देह म पसीना चुचवाये ग - २
सेवत - सेवत धान बढ़ाये ,
खटे जांगर के फल पाये ग - २
कतक सुग्घर कुंवर हावय , 
मोर दाई के कोरा।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

मगन होके नाचे किसान ,
करे सोनहा दाना के दान ग - २
किंदरे लहके लइका सियान ,
सुवा ददरिया गावे मितान ग - २
नवा धान पूस खुशी मांगे ,
घरो - घरो छेरछेरा।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

मनखे इहां के नीक लागे ,
छत्तीसगढ़ी बड़ मीठ लागे ग - २
अंतस के गोठ नइ लुकाये ,
घेंच मुड़ी अउ नवाये ग - २
छत्तीसगढ़ के खांटी तिहार
हरेली अउ तीजा पोरा।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

मोर छत्तीसगढ़ के माटी हावय ,
धान के कटोरा।
अही म देवता धामी बिराजे ,
जिहां होथे मेला।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के। ४

            रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
              सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
              मो.- 9165720460

Saturday, 7 January 2017

~• कइसन जुग •~

Created by-Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 03/11/2016
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अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
लइका सियान बनके, बेटा बाप ल सिखावथे।
दुध दही ह महुरा बनगे, अमरीत कस दारु ढ़रकावथे।
पीये बर नइ पावय पइसा, धान कोठी ल टोड़कावथे।
बुधारु ल कहें ठंडा पियादे, एक रुपिया नीये गुनगुनावथे।
दरुहा के संगवारी बर, फटफटी भट्ठी दउड़ावतथे।
अइसन जुग आ गय,आनी-बानी के होवथे।
बच्छर भर नइ होय बिहा, बहू सास ल डरवावथे।
ठेला म नइ दिखे पान, कोनो अब नइ खावथे।
लइका सियान तको, गुटका राजश्री चबलावथे।
पचर-पचर थूक-थूक, सफ्फा जगा ल ललियावथे।
भात साग के सुवाद नी पाय, खात-खात सुसवावथे।
अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
पढ़े लिखे म चेत नइये, मया के रद्दा जोहथे।
भाटा पताल गोभी करेला, बायलर कस उपजावथे।
पचर्रा होगे साग भाजी, थोरको घलो नइ मिठावथे।
बइला भंइसा होगे कमती, नांगर दंवरी नइ फंदावथे।
हंसिया कुदारी पजावत नइ, ट्रेक्टर हार्वेस्टर म मिसावथे।
अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
चिठ्ठी पाती के शोर नइये, बड़ मोबाइल म गोठियावथे।
अउ का कहिबे संगी मोर, सबो परिया पोगिरीयावथे।
गाय गरुवा के चरागन बिना, गऊ माता मन बेचावथे।
गुदूम डफरा गम्मत नी दिखे, डीजे धमाल बजात नाचथे।
सातुल इभ्भा भिर्री गंवागे, किरकेट ल जम्मो भावथे।
अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
डवकी सियान फेर मरे बिहान, डवका मुड़ धरके रोवथे।
घानी जाँता ढ़ेकी लुकागे, रंगे-रंग के मशीन आवथे।
धान कुटे ल छुटे हालर, ट्रेक्टर घरे पहूँच जावथे।
टूरा लइका अलाल होगे, मारे पीटे बर डंडा खोजथे।
टूरी लइका बेटा बनके, अपन दई ददा ल पोसथे।
सित्तोन नइये सत के राज, झूठ लबारी ल पतियावथे।
सुरता म मोर 'आँसू 'निकले, जम्मो चीज हर नंदावथे।

         रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
           मो. - 9165720460
                  7770989795

** वाह रे आतंकवाद **

Created by- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 18/12/2016
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   देश दुनिया ल तैं बैरी, नंगत काबर डरवाथस।
   चिटकन पीरा नइ लागे, नइ रंच भर पछताथस।
   तहुंच मनखे हावस फेर, मनखे ल काबर लुकाथस।
   काय मिलथे कसई बनके, अउ करले शरम लाज।
   वाह रे ! आतंकवाद ।

   बंदूक बारुद ल खेल बनाके, जगा जगा बम फटोथस।
   छाती ल कठवा पथरा बनाके, जनऊर बानी गुर्राथस।
   कतेक निकता मनखे के, अब्बड़ लहू बोहाथस।
   निरदोष परिवार के घर, गिराये करलई के गाज।
   वाह रे ! आतंकवाद ।

   काकर बर तैं बूता करे, का तोर लइका के बन जाही।
   गुनथस तैं जिंदा रबे, एक दिन पंछी तोर उड़ जाही।
   फउजी के चपेटा म परबे, तोर तो कुटी-कुटी हो जाही।
   गती नइ रहे मरे म तोर, खाही कूकुर कौआ तोर लाश।
   वाह रे ! आतंकवाद ।

              रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
           जिला - बलौदाबाजार-भा.पा.(छ.ग.)
         पिन - 493338,मो.- 9165720460