Wednesday, 28 November 2018

चुनाव संग्राम

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 30/10/2013

देश की लोकतंत्र में, जब - जब आता है मतदान।
गाँव - गाँव शहर - शहर में, चलती चुनाव संग्राम।
तरह - तरह के लुभावनी, सभा मे करते भाषण।
बच्चे बुढ़े युवा के बीच, बाँटे अपना बेनर ज्ञापन।
गली - गली चौक चौराहे, घुमे भोपू डीजे बजाते।
जन - जन को रिझाने, अपना कई घोषणा गिनाते।
साड़ी कंबल रुपया देते, मतभेद कराते बाप बेटे पर।
माहौल सजे त्यौहार सा, भोज मांस मदिरा बौछार कर।
सियासत के खातिर प्रत्याशी, कूदे चुनाव संग्राम पर।
एक दूजे के पोल खोलते, लगे बुराइयों की वार कर।
करेगी फैसला जनमत, किसके सिर पर होगा ताज।
जन का दुख दूर करेगा, पाँच बरस वह करेगा राज।

         रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
          मोबा. - 9165720460

Monday, 26 November 2018

मुझे क्या हो गया?

          "मुझे क्या हो गया ?"
जरा बता दो सच में मुझे ये क्या हो गया ?
दिल में बसा के तूझको तलबगार हो गया।

सुरत तेरी झुलते नजर मे, पास आके मुस्काते हो।
मीठी - मीठी नरम लबों से, महकती गुल खिलाते हो।
जेहन मे तु ही हर आलम मे।
क्या ये प्यार हो गया ?
जरा बता दो सच ...

अदाएँ तेरी कर के दीवाना, नाम तेरा ही रटता हूँ।
करवट बदलते रैना बीते, तड़प- तड़प के रहता हूँ।
भूख प्यास नहीं याद मे तेरी।
जाँ निसार हो गया।
जरा बता दो सच ...

लिखूँ पन्ने मे किसी पर, मुझे ना जाने तू ही लिखाती है।
औचक ही मेरी कलम से, तू ही कविता बन जाती है।
सात सुरों मे धुन सरगम से।
मिल के झंकार हो गया।
जरा बता दो सच ...

मुझे ये क्या हो गया?
मुझे ये क्या हो गया ?

रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)

मेरी प्रिया

        " मेरी प्रिया "
यादें तेरी सदैव प्रेयसी
मेरे हृदय मे रमा है
हर मुस्कान अदाएँ तेरी
मेरे तन - मन में
अत्यंत उल्लास कर देती है।
एक जनम नही सात जनम नही,
जनम - जनम तक साथ जीयेंगे
हम दिलों की संगम
अनुराग खुशी भाव भर देती है।
शरीर दो पर एक जान है,
दो दिल के एक अरमान है
मेरे नाम की दीप दिल में
जला रखना दीवाली मे
मैं सरहद पर दीप जलाता हूँ
माँ की रखवाली मे,
भारत की गौरव को अपार कर देती है।
तुम रौनक मेरे घर की,
मेरे उदासीनता आभास कर
डूबते तिनका बहते आँसू को
जिंदगी जीने प्रीत से आधार कर देती है।
ओ मेरी प्रिया ओ मेरी प्रिया..

रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
मोबा. - 9165720460

दीवाली

             * दीवाली *
दीप जलाओ प्रीत जगाओ
दीवाली में ....
दया दृष्टि से स्वच्छ करें
तन - मन की घर द्वार।
अहं ईर्ष्या बुराई की कचरे
चुन - चुनकर निकाल।
शांति सहज की रंग
चढ़ा कर,
निर्मल सौम्य बनायें,
हवा महल उर दीवार को।
सुख समृद्धि छाये,
दीपों की माला जगमग चमके
घर गली हर दरबार में।
गाँव शहर है,
राम की आयोध्या नगरी
धन वर्षा में माँ लक्ष्मी
पूजन रुप समाई है।
नव परिधान मे
सजे बदन,
बाँटे प्रेम की भाव मिठाई है।
दीप जलाओ प्रीत जगाओ
दीवाली में .....

रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)


Thursday, 25 October 2018

सुहाग

Created :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 05/06/2005

    मुझे जीवन का साथी उपहार चाहिए।
    बस तेरा उम्र भर का सजन प्यार चाहिए।

    तेरे चरणों की धूल , सिंदूर बनते ,
    तेरे मधुर वाणी से , शहनाई बजते ।
    ना कोई डोली ना रंगोली
    तेरे बाहों की झूले का हार चाहिए।
    बस तेरा उम्र ........
    
    आहट कदम की फूल , कंगना खनके।
    मिलते नजर बिंदिया , मेरी माथ चमके ।
    ना ऊँचा महल , ना ही शहर
    दिल की झोपड़ी साँसों का तार चाहिए।
    बस तेरा उम्र .......

    सफर जिंदगी में सोलह , गहना सजते।
    सदा तेरी मेरी धड़कन , अटूट बंध के।
    मिल के जल में तारा , गंगा जमुना की धारा।
    मैं बहती नदी की नाव तुम पतवार चाहिए।
    बस तेरा उम्र ......

    मुझे जीवन का साथी श्रृंगार चाहिए।
    बस !तेरा उम्र भर का सजन प्यार चाहिए।

          रचना :- तेरस कैवर्त (आँसू)
           सोनाडुला ,(बिलाईगढ़)
         जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
    

Friday, 19 October 2018

* इबारत *

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 18/07/2011
    इबारत भरी लब्ज
    वाकिब आकर्षित लगी लगन ,
    हर्षित तन - मन।
    खाश आकांक्षा लिये
    दिलों में मुकाम कायम ,
    बड़प्पन की हक अर्ज
    काबिज सम्मान स्वरुप मगन।
    जन समाज मे ...
    पत्थर भी पिघले
    ऎसी लब्ज की तासीर में ,
    पहचानी जाती महफिल भीड़ में
    फितरत कर कोटिश नमन। 
    याद नाबूद बाद भी ...
    अहं अल्फाज़ कर्कश
    खलिश मन गमदीदा भरे ,
    जेहन पर बद्दुआं तीखी निगाहें
    चमन कुंठित जमीं गगन।
    तस्लीम उन लहज को ,
    निशब्द और स्तब्ध हूँ ...

         रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू)
          सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
         जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
    


Saturday, 13 October 2018

* रूख महबूब की *

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 13/05/2014

   फैली मेरे महबूब की महक
   चंदन सी पवन उड़े,
   बिखरी जिससे हीरे की किरणें
   रजत की - सी उजली बदन।
   रेशमी जुल्फें ललाट पर लट
   वादी में उठे चाहत की ललक,
   जहाँ तरुणाई सजी कली से
   गुंजते चंहूँ ओर पायल की झनक।

   रोमांचित करती हर दृश्य
   कोमल अधरों की लाली,
   श्रृंगार करे नव रत्न जड़ित
   मधुरस मुख मधुर वाणी।
   गर्म साँसें भीनी-भीनी सौंधी
   हिरनी सी चंचलता शर्मीली,
   चुनरी पीछे झाँक रही नयन
   बसी! हृदय तल मेरी दिलवाली।

   पद चिन्ह से नख-शिखा तक
   प्रेम रंग की गुंजार लय,
   अंग-अंग में अद्भूत निखार
   भू-अंबर योग तड़ित चमक।
   प्रीत संग ली वचन बसंती
   नश-नश तरंग सनम की,
   मिलन सुकून पल हों सफल
   एकात्म बन सहे कई कसक।

        स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू)
          सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
          मोब. 9165720460
                  9399169503
       

Thursday, 11 October 2018

* भजन *

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 05/08/2013
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तेरी कंचन है काया अनमोल रे।ss
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।
ना तो तू गठरी का माया तोल रे।ss
अब तो हरि का नमन कर भोर ले।

एक बनाये पिंजरा, धड़कन के वास्ते।
दूसरे चुना है तुने, जीवन के रास्ते।
उड़ के अंधेरा करना ss 2
आस साँस छोड़ रे ss
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।

नर तन पाये तुने, औरों तो पता नही।
अपना बना है डेरा, दूसरे बसा कहीं।
नइयाँ तो पार लगा ले ss2
कपट की घूँघट खोल रे।
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।

कहते हो मेरा मेरा, कुछ नही पाओगे।
क्या लेकर आये जग में, क्या लेके जाओगे।
आना जाना सिर्फ अकेला ss2
दुनिया पड़ी है गोल रे ss
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।

तेरी कंचन है काया अनमोल रे।
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।

       स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
 

Thursday, 4 October 2018

** तेरस के दोहे **

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 12/01/2013
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(1) निर्मल पावन जल धरा, जीवन का आधार ।
      पवन बहे नभ वन चमन, स्वप्न करो साकार।।

(2) फूँक - फूँककर पग रखें, काँटे बिखरे राह।
      इधर - उधर ना ताकना, काबू रखो निगाह।।

(3) व्यर्थ समय ना टालना, पल - पल है अनमोल।
      क्षण - क्षण तू चलता रहे, कदम - कदम को तोल।।

(4) खग कब ठग उड़ जात है, काया माया छोड़।
      दम्भ भाव को त्याग के, मधुर मिलन तो जोड़।।

(5) मादक बेहद विष घना, लत मे जन है आज।
      पतन राह से तन जला, गृह पट दुख गिर गाज।।

(6) वर्षा दिन - दिन घट रही, नीर बहा ना लोग ।
      पास नाश भय भव बने, विपदा सूखा भोग ।।

(7) बेटी बेटा सा लगे, नही करो तुम भेद।
      कन्या चलो बचाव करें, अकल थाल मत छेद।।

(8) बरफ जमी है यूँ जमी, ठिठुर गये सब अंग।
      कंबल टोप ले कर रखो, पहन ढ़ाक तन संग।।
 
        रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
         सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
       जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
  मो. - 9165720460,7770989795

Tuesday, 25 September 2018

* पिरामिड विधा *

Created by : Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 02/03/2016

     हे
     भोले
     भंडारी
     सावन में
     जल की धारा
     काँवर ले कांधे
     संतों खूब चढ़ाये।

     हे
     देवा
     गणेश
     आये थोड़े
     दिन के भेंट
     रूला कर गये
     हमें अपने धाम।

     माँ
     काली
     आयेगी
     संहारने
     नव रुप में
     असूर मिटाने
     शेर पर सवार।

     माँ
     तेरी
     शरण
     ले लो मुझे
     सुख की खान
     आँसू छलकते
     बसी मन मन्दिर।

     हे
     राम
     लंका में
     दशहरा
     अहंकारता
     रूपी बैर नाश
     ज्ञान उजाला लाये।

     ये
     दीप
     जलाने
     वनवासी
     लौटे अवध
     जगमग जले
     भारत में दीवाली।

        तेरस कैवर्त्य (आँसू)
      सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
       कवि, गीतकार, गायक

* कदम से कदम मिलाते चलें *

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 14/03/2009
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    कदम से कदम मिलाते चले,
    प्रीत की रीत हम सजाते चले।
    अब ना ही थकेंगे ना ही रुकेंगे,
    साथ साथ गले लगाते चले।

    नारी लक्ष्मी काली बनकर, गद्दारों से टूट पड़ेंगे।
    चन्द्रशेखर भगत बनकर, भाईयों भीड़ पड़ेंगे।
    गंगा यमुना कावेरी सतलज, जल निर्म ल बहायेंगे।
    चंपा चमेली गुलाब केवड़ा, सुगंध फूल खिलायेंगे।

    डगर की काँटे हटाते चलें।
    कदम से कदम मिलाते चलें।

    पीपल नीम बरगद की, शीतल छांया की धरती है।
    कोयल मोर पपीहा की, मधुर तान भी निकलती है।
    सावन भादो सी हरियाली, दृश्य नयन रखें कायम।
    मथुरा गोकुल वृन्दावन, अयोध्या बसे नगरी पावन।

    जन धर्म कर्म को बचाते चलें।
    कदम से कदम मिलाते चलें।

    गीता रामायण महाभारत, नीति धर्म की ग्रंथ यहाँ।
    बाइबिल कुरान ग्रंथ साहिबा, भाई चारे का पंथ यहाँ।
    संस्कृति सभ्यता वेशभूषा, कितनी गजब निराली है।
    पर्व भरा राष्ट्रीयता की, दशहरा होली और दीवाली है।

    सत्य की जोत जलाते चलें।
    कदम से कदम मिलाते चलें।

     कदम से कदम मिलाते चलें।
     प्रीत की रीत हम बनाते चलें।
     अब ना ही थकेंगे ना ही रुकेंगे।
     साथ साथ गले लगाते चलें।

                रचना- तेरस कैवर्त्य (आँसू)
                   सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
               जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)


Sunday, 23 September 2018

* भारत का लाज बन जायें*

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 14/03/2009
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      भारत का लाज बन जायें,
      मुल्क की नाज बन जायें।

      प्रण करें करबध्द चित,
            नित प्रतिदिन ही नमन।
      सदैव ही मेरे वतन का,
            इस धरा पर लूँ जनम।

       प्रेम की राग बन जायें,
       मुल्क की नाज बन जायें।

       रक्षक बनें तत्पर भीड़ पड़े,
            शत्रु के आगे बढ़े कदम।
      आँच ना आये दामन पर,
            लड़ कर करें उनका पतन।

      आँधी और तूफान बन जायें,
      मुल्क की नाज बन जायें।

      एकता की बल मिसाल दें,
            ना टिकेंगे उनके क्रूर दमन।
      भय से जीने से बेहतर है,
            शहीदी की ओढ़ लें कफ़न।

      इंकलाब जाबांज बन जायें,
      मुल्क की आवाज बन जाये।

      ना उजड़े मोहक दृश्य जमीं,
            अपने मातृ है अनमोल रतन।
      यह धूल माथे तिलक सजे,
            प्राणों से हम करें जतन।

      तलवार और ढ़ाल बन जायें,
      मुल्क की हमराज़ बन जायें।

      झूकना हमें ना मंजूर है,
            भले कफन में जायें दफन।
      होंगे कामयाबी मेरे सैकड़ों वीर,
            क्योंकि है यह मेरा वतन।

      गौरव की ताज बन जायें।
      मुल्क की नाज बन जायें।


                रचनाकार :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                        सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
                 जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
                        पिन - 4 9 3 3 3 8
                मोबाइल - 9 1 6 5 7 2 0 4 6 0
          email; aansukai4545@gmail.com
 
 

   

Monday, 10 September 2018

~~ मेरी कल्पना ~~

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 05/06/1995       * कल्पना *
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     आप अत्यंत आकर्षक हो।
     आप में आकर्षण है।
     आप से आकर्षित हूँ।
     आसमान की घटा है ,
     तेरी रेशमी जुल्फें।
     धरती की छटा है ,
     तेरी मिलकती पलकें।
     हरी मदमाती यौवन से ,
     ओस की कण भी छलकें।
     आँखें है झील सी तेरी ,
     भौंहे जो लकीर की घेरी।
     मुख मंडल की कोमलता ,
     होंठ गुलाब की फूल है।
     मुस्कान उसकी पंखुड़ी , निगाहें बड़ी सुकून है।
     सुरत तेरी चाँद , बिंदिया सूरज की लाली है।
     साँसें सुहावनी खुश्बू से भरी पुरवाई है ,
     गर्दन सुराहीदार तेरी , बांहें सजीली और उत्तेजक है।
     लचकती पतली कमर, बुलबुल की चंचल चाल है।
     दो गोल गोरी कलाइयां , धड़कन को छुने लगी है।
     सुडौल जंघा आग सी , दहकती चमकती अंगारे है।
     रोम तेरी उगे सावन की , महीन हरियाली दुब है।
     गदराई वक्ष उभे संतरे , सोने पे सुहागा है।
     पायल की झंकार तेरी , कुदरत को भ्रमित कर दी।
     तुम्हें बनाने वाले ने, तरासी होगी बड़ी फुरसत से !
     परी मेनका और उर्वशी को भी , मात कर दी।
     वाह ! मेरी कल्पना हुस्न की मलिका....

        रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
          सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)

** आँखें **

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 03/02/2002     (Aankhen)
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      अनुपम उपहार है आँखें।
      औरों से प्यार में है आँखें।
      शरीर का श्रृंगार है आँखें।
      जग अंधकार है बिना आँखें।
      जीवन बेकार है बिना आँखें।
      मन की राहगीर है आँखें।
      निगाह सी तीर है आँखें।
      किस्मत की लकीर है आँखें।
      सारी अंग की वजीर है आँखें।
      देखने में बड़ी गंभीर है आँखे।
      अमूल्य नाजुक अंग है आँखें।
      कैसी बनावट ताजुब है आँखें ?

           रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
               सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
           जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)

Sunday, 2 September 2018

** प्यारी बहना **

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 19/01/2000 (Lovely Sister) रक्षाबंधन पर्व पर विशेष
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आओ मेरी प्यारी बहना।
कदम चुमे राखी की बंधना।

यादें तेरी बचपन की,
हमको कितना रुलायेंगी।
रुक जायेंगी दिल की,
धड़कन जब तु डोली से जायेगी।

रीति है दुनिया की प्यारी  ओ बहना।
रोना  नही  यूं ही हंसना बहना।
जाओ मेरी  प्यारी  बहना।
भइया को याद तुम करना।

खाली पड़ी माँ की आँचल,
छूटा है भइया का प्यार।
दूर खड़ी तेरी संग सहेली,
छोड़ दी बाबूल का द्वार।
स्वर्ग है तेरी  ससुराल ओ बहना।
सुख दुख सहते रहना बहना।
आओ मेरी प्यारी बहना।
राखी में भइया की अंगना।

ये घर छूटा शादी से तेरी,
पराये की तुम अरमान हो,
आयेगी मेरी इस दहलीज,
बनके तुम जब मेहमान हो।
हर खुशी तेरी शौहर है बहना।
यहीं पर जीना मरना बहना।
जाओ मेरी प्यारी बहना।
मइंया को याद तुम करना।


रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
  सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
मो. - 9165720460
email - aansukai4545@gmail.com






Friday, 10 August 2018

*प्रेम मिलन*

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 05/10/2005
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       श्रेष्ठ है जग में ऐसा अनमोल प्रेम मिलन।
       सदियों की ये कारवाँ मिलते है हर जनम।

      जमीं में पलकर सजी तरुणाई ,
      यौवन की चमक उग आयी है।
      माँ पिता भाई बहन स्नेह तले ,
      मुस्कान कली में भर आयी है।

      बंधती जाती है कलाई में रक्षा का बंधन।
      अटूट रिश्ते तो निभाने होते है मन वचन।

      सुमन पराग कण में मंडराते भौंरे ,
      कैसी निखार लाती रुत सुहानी।
      सावन की हरियाली सी सजती ,
      बचपन बीत जब आती है जवानी।

      संजोते छुप - छुपके करते प्रेम मिलन।
      मन में चाहत की दीप जलाते है प्रितम।

      सच्चे प्यार की आह भरते तन पे ,
      तोड़ कर लांघते हर ऊंची दीवार।
      अपने दम की इम्तिहान देकर भी ,
      प्यार झूकता नही झूकते हैं परिवार।

      कोई यहाँ रोता है तो कोई देते हैं जान।
      जीवन की दो पहिये यही होता अंजाम।

             स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
           जिला - बलौदाबाजार  ( छ. ग.)
               मो. 9165720460

   

Friday, 27 July 2018

कइसे बदलथे दुनिया

Create - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 03/03/2010
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कइसे बदलथे दूनिया भारी ग भइया।
नइ मिलय चिन्हारी
आवव भुइयां ल सिरजातेन संगी।
जुर मिल के बचातेन।

उजरथे हरियर जंगल झारी,
दिनो दिन बनथे ऊंची इमारती।
किसम किसम के दवाई दारू,
जरी जामथे रोज बिमारी।
बरखा करे बर नइ माटी झरे बर ss ल ल लss
आवव रुखवा ल लगातेन संगी
जुर मिल के बचातेन।

घाम झोरत हे छइंहा भगावथे,
जुन्ना रिवाज अब नंदावथे।
हाइब्रिड बिजहा उपजे नेता,
सावन भादो घलो सुखावथे।
आघु के संसो गुनके हम तो ss ल ल ल ss
पानी बूँद बूँद सकलातेन संगी।
जुर मिल के बचातेन।

करम लिखव अपने हाथ म,
जिन्गी चक्का झिन ढूले हरास म।
दाई ददा के सेवा जतन कर,
घर म घूमे चारो धाम ल।
आही पीढ़ी का जाने सुधरही ss ल ल ल ss
संस्कारी रद्दा बताथेन संगी
जुर मिल के बचातेन।

का होगे दुनिया रथिया गुनत,
जनम देवइया कुरिया रोवत।
पाई पाई बर तरसे माई बाप,
बहू बेटा मूंदे आँखी रेंगत।
फाटगे छाती कलपत हे जियरा ss ल ल ल ss
बाप बेटा के मया जोरातेन संगी
जुर मिल के बचातेन।

ये तन के ठिकाना नइये,
माटी म एक दिन जाना यहीं हे।
मनखे मनखे हन एके बरोबर,
सुख दुख ल बिसराना यहीं हे।
कचरा गरब के सफा जतन के s ल ल ल ss
ये माटी ल स्वर्ग बनातेन संगी
जुर मिल के बचातेन।


      स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला (बिलाईगढ़)
   जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
           मोबाइल- 9165720460



Saturday, 14 July 2018

*करमा नाचे चले आबे*

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date:- 05/01/2018
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B - चले आबे, चले आबे,  चले आबे ओ ss मोर रानी
      मया देहे मन ल मोहे चले आबे ओ
      मन लगा के करमा नाचे आबे न  -2

G - चले आहूँँ, चले आहूँँ,  चले आहूँँ गा ss मोर राजा
      मया देहे मन ल मोहे चले आहूँँ गा
      मन लगा के करमा नाचे आहूँँ न - 2

B - नरवा के तीर तीर चलथे पुरवाही, छम छम बजात पैरी आबे मोर दीवानी।
आबे अकेला एक बात मँय बताहूँ, बइंंहा म मया के संगी झूलना झूलाहूँ।
सुरता तोरेच आवे, अन्न पानी नी सुहावे ss होss होss
छोड़ झिन जाबे दुरिहा, समा जा मन कुरिया ओ मोर रानी
मया देहे मन ल मोहे चले आबे ओ
डर भगा के करमा नाचे आबे न।

 G- काये बात हे गा तँय चिटिकन बता दे, सुते जिया मोर हे संगी अब तो गा जगा दे
मन डोर खींचे खेले मया जाल गरी के, मोहनी खवाये तँय हा मोला का जरी के।
तरसथे मोरो चोला, सितो बिना देखे तोला ss होss होssहोss
बिहना अंधियरा संझा ढ़रते आहूँ गा मोर राजा।
मया देहे मन ल मोहे चले आहूँ गा
मन मता के करमा नाचे आहूँ न।

B - कुंवर हाथे म गोरी मेंहदी लगा ले, मोर नाँव के गोदना संग सुग्घर गोदा ले।
ओठ कर लाली आँखी काजर अंजा ले, हरियर लुगरा पहने गोड माहुर रचा ले।
आरो मोर लेके, गोई झिन कोनो देखे ss होss होss होss
तेरस कहत डहर जोहे आबे ओ, मोर रानी
मया देहे मन ल मोहे चले आबे ओ
मन लगा के करमा नाचे आबे न।

G - तंय रंग रसिया चल न करमा गड़ाहूँ, नाच के मांदर ताल भांँवर पराहूँँ।
मांगे म सेंदूर माथ टिकली लगाहूँ, आज मड़वा म तोला जिन्गी बनाहूँ।      
नजर झिन लगे कभू मया झिन छुटे रघु ss हो ss होss होss
डोली सजा के घर म तोरे आहूं गा मोर राजा
मया देहे मन ल मोहे चले आहूँँ गा
मन लगा के करमा नाचे आहूँँ न।

B - चले आबे, चले आबे चले आबे ओ ss रानी
     मया देहे मन ल मोहे चले आबे ओ।
     मन लगा के करमा नाचे आबे न।- 2
G - चले आहूं, चले आहूं चले आहूं गा मोर राजा।
      मया देहे मन ल मोहे चले आहूं गा।
      मन लगा के करमा नाचे चले आहूं गा। -2
B - मया देहे मन ल मोहे चले आबे ओ।
G - मन लगा के करमा नाचे आहूं गा।
Both- करमा के डार म तँय नाच लेेबे ओ
           मन लगा के करमा नाचे आबे ओ।

      गीतकार - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                   सोनाडुला (बिलाईगढ़)
             जिला - सारंगढध-बिलाईगढ़ (छ. ग.)


Thursday, 8 February 2018

* तंय बिराजे दाई *

Created by -Teras Kaiwartya(Aansu)
Date : 04/01/2018
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डोंगरी पहाड़ म ओ, अमरइया खार म।
तंय हर बिराजे दाई, कदली कछार म।
आजा बे आजा बे आजा बे ओ।
आजा बै चैत अउ कुंवार म।
डोंगरी पहाड़ म ओ, अमरइया खार म।
तंय हर बिराजे दाई कदली कछार म।

आमा के मउर, मउरत हावय ओ।
सुवा अउ कोयली कुहकत हावय न।
बगीया म फूल, फूलत हावय ओ।
भौंरा अउ भांवर, किंदरत हावय न।
दरसन बर आये तोर दाई।
दीदी बहिनी संग भाई।
तोरे मया के दुवार म।
डोंगरी पहाड़ म ओ, अमरइया खार म।
तंय हर बिराजे दाई, कदली कछार म।

डोंगरी पहाड़ म ओ, अमरइया खार म।
चल संगी नाच लेबो, करमा के डार म।
आजा बे आजा बे आजा बे ओ।
आजा बे मांदर के ताल म।
डोंगरी पहाड़ म ओ, अमरइया खार म।
चल संगी नाच लेबो, करमा के डार म।

मया के छंइहा, हमर बर कर दे ओ।
छुटे बंधना ल, जबर के जोर दे न।
भुखिया के कौरा, बजर भर भर दे ओ।
अंचरा के छाजन, निरधन बर घर दे न।
आँसू धरत ले करलाइ।
सुन ले न ओ समलाइ।
कल्पत नीचत गोहार ल।
डोंगरी पहाड़ म ओ, अमरइया खार म।
तंय हर बिराजे दाई, कदली कछार म।




स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
     सोनाडुला (बिलाईगढ़)
  जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)